शेर और चालाक खरगोश की कहानी – Lion and The Cunning Rabbit Story of Panchatantra In Hindi

पढ़िए पंचतंत्र की चतुराई और बुद्धिमता की कहानियाँ.. शेर और खरगोश की कहानी.!

शेर और चालाक खरगोश की कहानी:

Sher-aur-khargoash-panchtantra-hindi-story
शिक्षाप्रद कहानी – शेर और चालाक खरगोश

एक घने जंगल में एक बहुत ही शक्तिशाली और खतरनाक शेर रहता था। वह हर दिन शिकार पर निकलता और कई जानवरों को मार मारकर खा जाता था। इससे जंगल के सारे जानवर डर गए, उन्हें लगा कि अगर शेर इसी तरह सभी जानवरों को मारता रहा, तो जल्दी ही जंगल से सभी जानवर पूरी तरह खाली हो जाएगा।

जंगल में डर का माहौल बन गया। सभी शेर को रोकने का और अपने बचाव का कोई उपाय निकालना चाहते थे इसलिए, एक दिन जंगल के सभी जानवर इकट्ठा हुए और शेर से बचने के उपाय पर चर्चा करने लगे। अंत में, सभी जानवरों ने तय किया कि वह सभी मिलकर शेर के पास जाएंगे और इस मुद्दे पर उससे बात करेंगे।

अगले दिन जंगल के सभी जानवरों का एक समूह डरते हुए शेर के पास पहुंचा। जब शेर ने उन्हें अपनी ओर आते देखा तो, गुस्से में जोर से दहाड़ते हुए बोला, “क्या बात है? तुम सब यहां क्यों आए हो?”

उन्ही में से एक ने डरते हुए कहा, “महाराज, आप जंगल के राजा हैं और हम जानवर आपकी प्रजा। जब आप शिकार पर निकलते हैं, तो कई जानवरों को बेवजह ही मार देते हैं, और आप उनको खा भी नहीं पाते। इससे हमारी संख्या तेजी से कम हो रही है।

अगर यह ऐसे ही चलता रहा, तो जल्दी ही जंगल में आपके अलावा कोई नहीं बचेगा और महाराज, प्रजा के बिना राजा कैसे रह सकता है? अगर हम सब खत्म हो गए, तो आप किस पर राज करेंगे?

इसलिए हम चाहते हैं कि आप हमेशा हमारे राजा बने रहें। हम आपसे यह गुजारिश करने आए हैं कि आप शिकार पर जाना बंद कर दें। हम रोज एक जानवर खुद आपके खाने के लिए भेज देंगे। इससे राजा और प्रजा दोनों शांति से रह सकेंगे।”

यह भी पढ़ें: गाय और शेर: पंचतंत्र की कहानी | हंस और कौए की कहानी– (बुरी संगत की कहानी)

शेर ने उनकी बात सुनी और सोचा कि उनकी बात में सच्चाई है। थोड़ी देर सोचने के बाद उसने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हारी यह बात मान लेता हूं। लेकिन ध्यान रखना, अगर किसी भी दिन तुमने मुझे पूरा खाना नहीं भेजा, तो मैं जितने चाहूं उतने जानवर मार डालूंगा।”

जानवरों के पास कोई और रास्ता नहीं था, इसलिए उन्होंने शेर की बात मान ली और अपने-अपने घर लौट गए। तब से हर दिन शेर के खाने के लिए एक जानवर भेजा जाने लगा, और यह तय किया गया कि जंगल के सभी जानवरों में से बारी-बारी से कोई शेर के पास उसकी भूख मिटाने के लिए जाएगा।

एक दिन इसी तरह करते हुए एक छोटे खरगोश की बारी आई। वह खरगोश छोटा तो था, लेकिन बेहद ही चतुर था। खरगोश शेर के पास जाते हुए सोचा, “अगर मैं सीधे शेर के पास चला गया तो मारा जाऊंगा। मुझे अपनी जान बचाने के लिए कोई तरीका सोचना होगा, और शायद ऐसा तरीका ढूंढ सकूं जिससे सबकी जान बच सके।”

ऐसा सोचते हुए वह शेर की गुफा की ओर जा ही रहा था कि उसे एक कुआं दिखाई दिया, उसने थोड़ी देर सोचा और फिर एक योजना बनाई और खरगोश शेर के पास धीरे-धीरे जाने लगा।

जब वह शेर के पास पहुंचा, तो शेर भूखा और बहुत ही गुस्से में था। जैसे ही उसने उस एक छोटे से खरगोश को देखा, वह और भी गुस्सा हो गया और दहाड़ते हुए बोला, “यह क्या मजाक है? इतनी देर में एक छोटा सा खरगोश भेजा है?”

नन्हे खरगोश ने अपना सिर झुकाकर कहा, “महाराज, आप मेरी बात सुन लें, तो मैं आपको बताऊं कि हम सबका दोष नहीं है। हम सभी जानवर जानते थे, कि मैं एक अकेला छोटा सा खरगोश आपके पेट के लिए पूरा नहीं होउँगा, इसलिए उन्होंने छह खरगोश भेजे थे।

लेकिन, आते वक्त रास्ते में हमें एक और शेर मिल गया, जिसने पांच खरगोशों को मारकर खा लिया।” शेर यह सुनकर गुस्से से गरजते हुए बोला, “क्या? एक और शेर? वो कहां है?” खरगोश ने कहा, “महाराज, वह बहुत बड़ा शेर है। वह एक गहरी गुफा से निकला था।

वह मुझे भी मारने के लिए आया था। लेकिन मैंने उससे कहा, ‘आप नहीं जानते कि आपने क्या किया। हम सब अपने राजा के लिए जा रहे थे और आपने उनका पूरा खाना खा लिया।

अगर हमारे राजा को यह पता चला, तो वे आपको सजा देने आ जाएंगे।’ तब उसने मुझसे पूछा, ‘तुम्हारा राजा कौन है?’ मैंने कहा, ‘हमारे राजा जंगल के बहुत ही शक्तिशाली शेर है।’ फिर वह शेर गुस्से से लाल होकर बोला, ‘तुम बेवकूफ हो, इस जंगल का असली राजा मैं हूं! सारे जानवर मेरे अधीन हैं। मुझे जो करना हो, मैं कर सकता हूं।

और तुम किस राजा की बात कर रहे हो, उसे मेरे सामने लेकर आओ। मैं भी तो उसे बताऊं कि असली राजा कौन है?’ इतना कहकर उस शेर ने मुझे आपके पास आपको लेने के लिए भेजा है।”

खरगोश की बात सुनकर शेर को बहुत गुस्सा आया, और वह बार-बार दहाड़ने लगा। उसकी तेज आवाज से पूरा जंगल कांपने लगा। “मुझे तुरंत उस शेर का पता बताओ!” शेर ने गुस्से में कहा, “जब तक मैं उसे मार नहीं डालूंगा, मुझे शांति नहीं मिलेगी।

खरगोश ने कहा, “जी महाराज, वह शेर सजा का हकदार है, अगर मैं और बड़ा और ताकतवर होता, तो मैं खुद उसके चिथड़े-चिथड़े कर मार डालता।”

यह भी पढ़ें: मुसीबत के समय संयम और बुद्धिमानी से काम करना (Hindi Moral Story)

“चलो, रास्ता दिखाओ,” शेर ने कहा, “जल्दी बताओ, कहां जाना है?” “इधर आइए, महाराज,” खरगोश ने शेर को रास्ता दिखाते हुए एक कुएं के पास ले जाकर कहा, “महाराज, वह बुरा शेर एक गहरे किले में रहता है। आपको थोड़ा सावधान रहना होगा, क्योंकि किले में छिपे दुश्मन से निपटना मुश्किल होता है।”

“मैं उससे निपट लूंगा, शेर ने कहा, “बस तुम मुझे बताओ, वह कहां रहता है?” खरगोश ने कहा, महराज “पहले मैंने उसे जब देखा था, तो वह अपने किले के बाहर ही खड़ा था। अब लगता है, उसने आपको आते देख लिया और वह डरकर किले के अंदर चला गया है, आइए, मैं आपको दिखाता हूं।”

खरगोश ने शेर को कुएं के पास ले जाकर उसे पानी में झांकने को कहा। जैसे ही शेर ने कुएं में झांका, उसे पानी में अपनी ही परछाई दिखी। अपनी परछाई देखकर शेर समझा कि कोई दूसरा शेर है।

गुस्से में आकर उसने जोर से दहाड़ लगाई, कुएं में से उसके ही आवाज़ अधिक तेज़ से सुनाई दी यह देखकर शेर को बहुत गुस्सा आ गया और बिना सोचे-समझे कुएं में कूद पड़ा। कूदते ही पहले वह कुएं की दीवार से टकराया और फिर पानी में गिरकर डूब गया और मर गया।

चतुर खरगोश ने अपनी जान बचाई और खुशी-खुशी जंगल वापस लौट आया। उसने सभी जानवरों को शेर के मरने की कहानी सुनाई। यह सुनकर जंगल में खुशी की लहर दौड़ गई, और सभी जानवर खरगोश की बहादुरी की तारीफ करने लगे।

सीख: हमें कठिन समय में भी हमेशा ताकत से ज्यादा दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए। छोटे से खरगोश ने अपनी चतुराई से बड़ी मुसीबत से बचने का तरीका ढूंढा, जबकि शेर ने बिना सोचे-समझे गुस्से में आकर गलत कदम उठाकर अपनी जान गवां दी।


अगर आपको यह पंचतंत्र की नैतिक – शिक्षाप्रद कहानी अच्छी लगी तो आप इस Hindi moral Story for Kids को अपने परिवार-जनों के साथ ज़रूर शेयर करें।

Previous articleमित्र की सलाह (गधा और गीदड़ की कहानी) – Moral Story of Panchatantra for Kids
Next articleMauni Amavasya 2025: क्यों खास है मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान (Why Ganga Bath is Special on Mauni Amavasya)