भेड़िया और सारस की कहानी – Moral Story of Wolf and The Crane

पंचतंत्र - भेड़िया और सारस की कहानी, Short moral story of the wolf and the stork (Bhediya aur Saras ki Kahani) .... स्वभाव से धूर्त व्यक्ति से कभी भी कृतज्ञता की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए!


भेड़िया और सारस – नैतिक शिक्षा की कहानी:

bhediya aur saras ki kahani

The wolf and the crane story in Hindi

एक बार एक भेड़िया किसी जानवर का माँस को खा रहा था और माँस को जल्दबाज़ी में खाने के कारण उसके गले में एक हड्डी फँस जाती है। काफी कोशिशें करने के बाद भी भेड़िया हड्डी बाहर नही निकाल सका। अब वो एक बहुत ही बुरी स्थिति में फस चुका था।

वह सोचने लगा कि, “अगर यह हड्डी मेरे गले में युहीं फँसी रही और बाहर नही निकली, तो मैं कुछ भी खाने – पीने नहीं सकूँगा और भूख-प्यास से तड़पकर मर जाऊँगा।”

भेड़िया अब अपने गले में फँसी हड्डी को निकालने के लिए कोई उपाय सोच ही रहा था, कि उसे तभी एक सारस दिखा, जिसकी चोंच लम्बी थी। उसको देखते उसको एक सुझाव आया की सारस उसकी गले में फँसी हुई हड्डी को निकालने में उसकी मदद कर सकता है।

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वह मदद के लिए सारस के पास गया और उसने सारस से कहा कि, “वो उसकी गले में फँसी हुई हड्डी निकालने में मदद करे, बदले में वह सारस को इनाम देगा।”

पहले तो, सारस भेड़िये के मुँह में अपनी चोंच डालने की बात से घबराया। लेकिन, भेडिये के बार-बार बोलने और इनाम के लालच में सारस ने हाँ कर दी और कुछ ही समय में सारस ने भेडिये के गले में फँसी हुई हड्डी निकाल दी।

भेड़िया गले से हड्डी निकलते ही वहाँ से जाने लगा, तब सारस ने उससे कहा, “मेरा इनाम कहाँ हैं?”

तब भेड़िये ने सारस से कहा कि, “तुम्हारा सिर, मैंने अपने मुँह में होने के बाद भी बिना दबोचे ही बाहर निकालने दिया, और तुम सही-सलामत हो, क्या यह किसी इनाम से कम है।”

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नैतिक शिक्षा: धूर्त लोगों से आभार या कृतज्ञता की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

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